विकास प्रक्रिया में हमारी सहभागिता

14.04.2018 *# विकास प्रक्रिया में हमारी सहभागिता:* _*ग्रामीण विकास के विभिन्न सोपान क्या हैं ?*_ _*ग्रामीण विकास की सही प्रक्रिया क्या है ?*_ _*ग्राम पंचायत और प्रशासन की ग्राम विकास में क्या भूमिका होती है ?*_ _*ग्राम सभा और ग्रामीणों की ग्राम विकास में क्या भूमिका है ?*_ इन सभी सवालों का जवाब ज्यादातर पढ़ा-लिखा नागरिक भी नहीं जानता है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के मायने इस बात से निर्धारित होते हैं कि कितने घरों में हेंडपंप लगाए गए ? कितने रास्तों पर खरंजा करवाया गया ? कितने लोगों का नाम BPL लिस्ट में दर्ज किया गया और कितने लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला ? सामान्यतः यह मान्यता है कि सरकार द्वारा ग्राम विकास के लिए कुछ पैसा आता है, जिसको सरपंच साहब प्रशासन की सहायता से गांव के विकास में लगाते हैं और कमोबेश यही स्थिति शहरी विकास की भी है । भारत वर्ष के शायद ही कुछ गांव होंगे; जहां पर ग्राम सभा द्वारा विकास के प्रस्ताव सही से तैयार किए जाते हैं और उन प्रस्तावों को ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित करके प्रशासन के पास प्रशासनिक और वित्तीय अनुमति के लिए भिजवाया जाता हो और उसके बाद ग्रामीणों की आवश्यकता के अनुसार विकास कार्य होता हो । कहने का अर्थ यह है की जन जागरूकता और जन सहभागिता के बिना ग्रामीण विकास का सपना आज भी साकार नहीं हो पा रहा है । केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के लिए हजारों करोड़ का बजट प्रतिवर्ष अनुमोदित किया जाता है और खर्च भी किया जाता है । प्रशासन द्वारा न केवल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है बल्कि उनकी मॉनीटरिंग भी की जाती है परंतु लोगों में जन जागरूकता के अभाव के कारण इन योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाता है । सोच बदलो गांव बदलो टीम का यह मानना है कि ग्रामीण विकास के सपने को यदि साकार करना है तो सरकार के प्रयासों को हमें ताकत देने की जरूरत है । लोगों में जन-जागरूकता और विकास के लिए जन-चेतना पैदा करनी होगी । लोगों को विकास में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी । इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत है हमारे देश के वर्तमान और भविष्य कही जाने वाली हमारी युवा पीढ़ी आगे आए और अपनी उर्जा को सकारात्मक व रचनात्मक कार्यों में लगाए । इस देश की एकमात्र आशा की किरण हमारी युवा पीढ़ी ही है जो जन-चेतना और जन-जागरूकता द्वारा देश को उन्नति के रास्ते पर ला सकती है । विकास कार्यों को तेजी देकर अभूतपूर्व बदलाव ला सकती है । सोच बदलो गांव बदलो टीम के कर्मठ कार्यकर्ता श्री मनीराम जी द्वारा ग्रामीण विकास की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही सरल शब्दों में समझाने का प्रयास किया गया है । हम आशा करते हैं कि हमारी युवा पीढ़ी इस जानकारी का उपयोग अपने गांव और शहर के विकास के लिए कर सकेगी । 1. ग्रामीण विकास के लिए सर्वप्रथम गांव के सभी सदस्यों, विशेषकर युवा पीढ़ी, द्वारा ग्राम सभा आयोजित की जाए और उनमें भागीदारी की जाए । ग्राम पंचायत, सरपंच और सदस्यों के साथ मिलकर ग्राम स्तर के विकास कार्यों का एक वार्षिक प्लान तैयार करवाया जाए । ग्राम पंचायत, सरपंच और सचिव ग्राम सभा की मीटिंग आयोजित करने और उस को संचालित करने के लिए जिम्मेदार हैं । ग्राम सभा का आयोजन और उसके द्वारा ग्राम विकास की चर्चा और वार्षिक प्लान तैयार करना, किसी भी पंचायत और गांव के विकास के लिए सबसे पहली जरूरत है । यदि किसी ग्राम पंचायत में ग्राम सभा का आयोजन नहीं किया जाता है, तो इसकी सूचना प्रशासनिक अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों को को दी जाए । 2. वार्षिक प्लान तैयार करने के बाद, ग्राम पंचायत से पंचायत समिति में उक्त विकास कार्यों को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजा जाए । 3. इसके उपरांत समय-समय पर गांव के सरपंच और लगभग 4-5 वरिष्ठ और सम्मानित नागरिकों को विकास अधिकारी से मिलकर उक्त विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट जानने का प्रयास करना चाहिए । साथ ही लिखित पत्र भी देने होंगे ताकि आपके यह प्रयास अथवा अधिकारियों से मुलाकात व्यर्थ ना जाए बल्कि रिकॉर्ड में दर्ज रहे इसलिए लिखित में देना ज्यादा कारगर साबित होता है । इस कार्य में गांव की युवा पीढ़ी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है । आवश्यकता पड़ने पर आरटीआई और टोल फ्री नंबर 181 का भी उपयोग किया जा सकता है । 4. विकास अधिकारी, पंचायत समिति के उक्त विकास कार्यों को स्वीकृति के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को प्रस्ताव भेजेगा । 5. यहाँ भी आपको लिखित पत्रों के साथ कई बार फॉलोअप करना पड़ेगा, जब तक कि उक्त विकास कार्यों की प्रशासनिक और वितीय स्वीकृति नहीं मिल जाती । 6. इस संपूर्ण प्रक्रिया में (वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति मिलने तक) 1-2 वर्ष का भी समय लग सकता है । इसलिए आपको धैर्य और संयम रखते हुए; प्रत्येक चरण पर लगातार फॉलोअप करना ही पड़ेगा । एक बार वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति आने के बाद कार्य शुरू हो जाता है, उस समय हम सब की जिम्मेदारी बनती है कि काम गुणवत्तापूर्ण हो । हमें ध्यान रखना चाहिए कि ग्राम विकास के लिए आया प्रत्येक नया पैसा, हम सबका पैसा है और उसका सदुपयोग सुनिश्चित करना, हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है । 7. इसके अलावा गांव के वरिष्ठ व सम्मानित सदस्यों के साथ आपको अपने जन प्रतिनिधि, प्रधान, जिला प्रमुख, MLA से भी अपनी मांगों को पूरा करने के लिए यथासंभव मिलना होगा ताकि आप की मांगों पर त्वरित कार्यवाही हो सके । 8. इस प्रकार आप इस विकास प्रक्रिया में सहभागी बनकर कुछ ही वर्षों में अपने गांव सूरत बदल सकते हैं । दोस्तों ! जब आपको जन प्रतिनिधि और प्रशासन का सहयोग नहीं मिल रहा हो, तो आप सभी लिखित पत्रों का हवाला देकर, टॉल फ्री नंबर 181 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं । फॉलोअप के लिए RTI भी लगा सकते हैं और उच्चतम अधिकारियों अथवा CM को भी ईमेल कर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं । 9. सोच बदलो गांव बदलो टीम, सभी साथियों से निवेदन करती है कि सरकार और प्रशासन का सहयोग करके ग्राम विकास में सहभागी बनो । आपके द्वारा किए गए जमीनी प्रयास ही धरातल पर बदलाव ला सकते हैं । केवल जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और सरकार को कोसने से हमारी तकदीर नहीं बदल सकती । हमें अपने अधिकारों के लिए सजग होना होगा और तभी हम सच्चे अर्थों में अपने गांव, शहर, देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर सकेंगे । 10. उम्मीद है इस लेख को पढ़ने के बाद आप सभी एक जिम्मेदार नागरिक की भांति, अपने नैतिक कर्तव्यों की पालना हेतु, अपने गांव अथवा शहर के विकास के लिए सक्रिय और जमीनी तौर पर भागीदारी निभाने के लिए आगे आएंगे । धन्यवाद । जय हिन्द । एसबीजीबी टीम

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