समाज का भविष्य- वर्तमान युवा पीढ़ी और भावी पीढ़ी (बच्चों)

12 Sep 2017 to 13 Sep 2017
किसी भी समाज का भविष्य उसकी वर्तमान युवा पीढ़ी और भावी पीढ़ी (बच्चों) पर निर्भर करता है| यह स्थापित सत्य है कि यदि किसी भी समाज को अवनति और विनाश की ओर ले जाना है तो उसकी वर्तमान और भावी पीढ़ी को कुसंस्कारित कर दो | जब बच्चों और युवा पीढ़ी में शिक्षा व संस्कारों का अभाव होगा तो समाज का विनाश होना तय है| यह समाज का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के अभाव में ज्यादातर युवा पीढ़ी भटकी हुई है और बच्चों को भी अच्छी शिक्षा और संस्कार नहीं दिए जा रहे हैं| अच्छी शिक्षा और संस्कारों के अभाव में हमारा युवा हताश-निराश होकर गलत रास्ते पर जा रहा है| सोच बदलो गांव बदलो टीम अपने प्रयासों से हमारी युवा पीढ़ी का उचित मार्गदर्शन करने और बच्चों में अच्छे संस्कार देने का छोटा सा प्रयास कर रही है| “आओ पढ़े-आगे बढ़े” कार्यक्रम इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर संचालित किया जा रहा है| इस कार्यक्रम के दौरान बच्चों को उचित मार्गदर्शन देने और समाज और राष्ट्र के लिए काम करने हेतु प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है| सोच बदलो गांव बदलो टीम का मानना है कि यदि हम बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जाएं और उनका उचित मार्गदर्शन किया जाए तो समाज का भविष्य सुनहरा होगा| दोस्तों क्लीन विलेज ग्रीन विलेज के बाद में आओ पढ़े आगे बढ़े प्रोग्राम सोच बदलो गांव बदलो टीम का एक अनूठा प्रयास है जिसमें राजस्थान के विभिन्न भागों में पढ़े-लिखे लोग समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को पूरा करने हेतु भाग ले रहे हैं| हमारी टीम के आधारस्तंभ श्री लाखन सिंह जी व श्री देवेंद्र जी और उनके साथीअमित जी, लवकेश जी, भगवान दास जी, रुप सिंह जी, महेन्द्र जी,श्री निवास जी विद्यालयों में जाकर अपने ओजस्वी भाषण से बच्चों में नई जान डाल रहे हैं| उन का मूल मंत्र है- "जैसा हम सोचते हैं" "जैसा हम सुनते हैं" "जैसा हम बोलते हैं" "हम वैसे ही बन जाते हैं" मैं आप सब लोगों से निवेदन करता हूं कि आप भी अपने क्षेत्र में और अपने गांव में विद्यालयों में जाकर बच्चों को जरूर प्रोत्साहित करें और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें| हमारा मानना है कि यदि हम अपने इन प्रयासों से एक बच्चे को भी सही मार्ग दर्शन देकर एक अच्छा इंसान बना पाये तो यह हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी क्योंकि एक और एक हमेशा दो नहीं होते; एक और एक मिलकर ग्यारह भी बनाते हैं| आओ मिलकर अपने सामाजिक उत्तरदायित्व को पूरा करें और समाज को आगे ले जाने में अपने योगदान व अपनी जिम्मेदारी को पूरी करें।