हमारे बारे में

सोच बदलो - गाँव बदलो

वैचारिक जन चेतना और जन जागरूकता ही समाज के विकास का आधार है। हमारे गाँवों में जागरूकता का अभाव, शिक्षा का अनुगामी, रोजगार या व्यवसाय के सदनों का अभाव, आधारभूत सुविधाएँ (जैसे रहने योग्य घर, पीने योग्य पानी, पक्की सड़कें, शौचालय) का अभाव, अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, आधुनिक खेती के प्रति अनारक्षितता। , पानी की कमी, सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के विषय में पर्याप्त जानकारी का अभाव और योग्य लाभार्थी जब तक योजनाओं का लाभ न पहुँचता है, तब तक। इन्हीं समस्याओं ने समाज में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक लोकतंत्र और न्याय स्थापित कर एक समतामूलक समाज स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा खड़ी हुई है। अतः इन सभी समस्याओं के समाधान और ग्रामीण भारत के जीवन स्तर में गुणात्मक परिवर्तन लाने के लिए शिक्षित, जागरूक और संगठित युवा पीढ़ी ने नई सोच, नए उत्साह और उमंग के साथ "सोच बदलो-गाँव बदलो" अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ काम कर रहा है: -

1. गाँवों में सकारात्मक सोच और रचनात्मक कार्यों द्वारा जन जागरूकता पैदा करना और विकास के लिए जनचेतना पैदा करना ताकि हम अपने अधिकारों और स्लावों के प्रति संवेदनशील हो सकें और विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनें |

2. गाँवों की स्थानीय समस्याओं पर विचार करने का और उनका स्थानीय स्तर पर समाधान खोजने का प्रयास करना। गाँवों के विकास को गति देने के लिए "गाँव विकास समितियों" का गठन करना। जिसका प्रमुख दो ग्राम सभा और ग्राम पंचायत के साथ सहयोगात्मक समन्वय द्वारा गांव के विकास के लिए कार्य करना |

3. युवा पीढ़ी का उचित मार्गदर्शन करना और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना ताकि हमारे युवा प्रगति पथ पर आगे बढ़ें, राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भागीदारी रहें और अपने माँ-बाप, गाँव व देश का नाम रोशन करें।

4. बच्चों को अच्छे संस्कारों और अच्छी शिक्षा के लिए प्रेरित करना। बच्चों में मानवीय मूल्यों को शामिल करना ताकि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ साथ सामाजिक स्तर में भी सुधार हो। इस हेतु गाँवों में बाल संस्कार केंद्रों की स्थापना करना। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कार्य करना |

5. बच्चों को नियमित रूप से सम्मानित और प्रेरित करना। शिक्षा के क्षेत्र में जरूरतमंद बच्चों की आर्थिक सहायता करना। गाँवों में "पुस्तकालय खुलवाना" और उनका नियमित संचालन करना। "उत्थान कोचिंग संस्थान" के नाम से कोचिंग संस्थानों की स्थापना करना और संचालन करना।

6. ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों की जानकारी देना। सरकारी योजनाओं (केंद्र / राज्य / नाबार्ड) की जानकारी और उनके लाभ लाभार्थियों तक पहुँचाने में सरकारी एजेंसीज का सहयोग करना। इस अभियान का मूल मंत्र है - आमजन की सक्रिय भागीदारी ही विकास का आधार है।

7. "वित्तीय समावेशन" सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम आयोजित करना। वित्तीय समावेशन के महत्व के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करना और क्रेडिट (KCC / GCC / ACC) के विषय में जागृति लाना। अधिकतम लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास करना |

8. स्वयं सहायता समूह, किसान समूह, महिला मंडल, युवा संगठन औरम चौपाल जैसी व्यवस्थाओं को स्थापित करके लोगों को नियमित रूप से भागीदारी के लिए प्रेरित करना और गांव के सुधार एवंम विकास कार्यों पर परिचर्चा और सामूहिक निर्णय के लिए प्रेरित करना है। सहकारी समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का प्रयास करना |

9. लोगों को पर्यावरण के विषय में जागरूक करना ताकि पेड़ व पानी का संरक्षण किया जा सके। इसके अंतर्गत वृक्षारोपण, जल संरक्षण अभियान, अतिक्रमण मुक्ति अभियान, स्वच्छता अभियान इत्यादि कार्यक्रम संचालित करना | किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना ताकि उन्नत खेती के साथ हमारे गाँवों में खुशहाली लाई जा सके।

10. लोगों में परिवर्तन, समरसता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवतावादी सोच को बढ़ावा देना। न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित समतामूलक समाज का निर्माण करना।

सोच बदलो गांव बदलो टीमवेयर, सजग, संवेदनशील और प्रबुद्द युवाओं / नागरिकों विशेष रूप से ग्रामीण परिवेश से संबंध रखने वाले युवाओं से अनुरोध करता है कि अपने सकारात्मक, धैर्यवान, नवाचारी विचारों और सुझावों से गांवों के संपूर्ण विकास के महत्वाकांक्षी सपनों को पूरा करें। । अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। आओ! सकारात्मकता और रचनात्मकता पर आधारित एक नए ग्रामीण भारत का निर्माण करें।

हम क्या हैं

वैचारिक जन चेतना और जन जागरूकता ही समाज के विकास का आधार है। हमारे गाँवों में जागरूकता का अभाव, शिक्षा का अनुगामी, रोजगार या व्यवसाय के सदनों का अभाव, आधारभूत सुविधाएँ (जैसे रहने योग्य घर, पीने योग्य पानी, पक्की सड़कें, शौचालय) का अभाव, अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, आधुनिक खेती के प्रति अनारक्षितता। , पानी की कमी, सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के विषय में पर्याप्त जानकारी का अभाव और योग्य लाभार्थी जब तक योजनाओं का लाभ न पहुँचता है, तब तक। इन्हीं समस्याओं ने समाज में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक लोकतंत्र और न्याय स्थापित कर एक समतामूलक समाज स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा खड़ी हुई है। अतः इन सभी समस्याओं के समाधान और ग्रामीण भारत के जीवन स्तर में गुणात्मक परिवर्तन लाने के लिए शिक्षित, जागरूक और संगठित युवा पीढ़ी ने नई सोच, नए उत्साह और उमंग के साथ "सोच बदलो-गाँव बदलो" अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ काम कर रहा है: -

1. गाँवों में सकारात्मक सोच और रचनात्मक कार्यों द्वारा जन जागरूकता पैदा करना और विकास के लिए जनचेतना पैदा करना ताकि हम अपने अधिकारों और स्लावों के प्रति संवेदनशील हो सकें और विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनें |

2. गाँवों की स्थानीय समस्याओं पर विचार करने का और उनका स्थानीय स्तर पर समाधान खोजने का प्रयास करना। गाँवों के विकास को गति देने के लिए "गाँव विकास समितियों" का गठन करना। जिसका प्रमुख दो ग्राम सभा और ग्राम पंचायत के साथ सहयोगात्मक समन्वय द्वारा गांव के विकास के लिए कार्य करना |

3. युवा पीढ़ी का उचित मार्गदर्शन करना और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना ताकि हमारे युवा प्रगति पथ पर आगे बढ़ें, राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भागीदारी रहें और अपने माँ-बाप, गाँव व देश का नाम रोशन करें।

4. बच्चों को अच्छे संस्कारों और अच्छी शिक्षा के लिए प्रेरित करना। बच्चों में मानवीय मूल्यों को शामिल करना ताकि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ साथ सामाजिक स्तर में भी सुधार हो। इस हेतु गाँवों में बाल संस्कार केंद्रों की स्थापना करना। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कार्य करना |

5. बच्चों को नियमित रूप से सम्मानित और प्रेरित करना। शिक्षा के क्षेत्र में जरूरतमंद बच्चों की आर्थिक सहायता करना। गाँवों में "पुस्तकालय खुलवाना" और उनका नियमित संचालन करना। "उत्थान कोचिंग संस्थान" के नाम से कोचिंग संस्थानों की स्थापना करना और संचालन करना।

6. ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों की जानकारी देना। सरकारी योजनाओं (केंद्र / राज्य / नाबार्ड) की जानकारी और उनके लाभ लाभार्थियों तक पहुँचाने में सरकारी एजेंसीज का सहयोग करना। इस अभियान का मूल मंत्र है - आमजन की सक्रिय भागीदारी ही विकास का आधार है।

7. "वित्तीय समावेशन" सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम आयोजित करना। वित्तीय समावेशन के महत्व के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करना और क्रेडिट (KCC / GCC / ACC) के विषय में जागृति लाना। अधिकतम लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास करना |

8. स्वयं सहायता समूह, किसान समूह, महिला मंडल, युवा संगठन औरम चौपाल जैसी व्यवस्थाओं को स्थापित करके लोगों को नियमित रूप से भागीदारी के लिए प्रेरित करना और गांव के सुधार एवंम विकास कार्यों पर परिचर्चा और सामूहिक निर्णय के लिए प्रेरित करना है। सहकारी समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का प्रयास करना |

9. लोगों को पर्यावरण के विषय में जागरूक करना ताकि पेड़ व पानी का संरक्षण किया जा सके। इसके अंतर्गत वृक्षारोपण, जल संरक्षण अभियान, अतिक्रमण मुक्ति अभियान, स्वच्छता अभियान इत्यादि कार्यक्रम संचालित करना | किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना ताकि उन्नत खेती के साथ हमारे गाँवों में खुशहाली लाई जा सके।

10. लोगों में परिवर्तन, समरसता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवतावादी सोच को बढ़ावा देना। न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित समतामूलक समाज का निर्माण करना।

सोच बदलो गांव बदलो टीमवेयर, सजग, संवेदनशील और प्रबुद्द युवाओं / नागरिकों विशेष रूप से ग्रामीण परिवेश से संबंध रखने वाले युवाओं से अनुरोध करता है कि अपने सकारात्मक, धैर्यवान, नवाचारी विचारों और सुझावों से गांवों के संपूर्ण विकास के महत्वाकांक्षी सपनों को पूरा करें। । अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। आओ! सकारात्मकता और रचनात्मकता पर आधारित एक नए ग्रामीण भारत का निर्माण करें।

हमारा उद्देश्य क्या है

1. समाज में विकास की जन चेतना व जन जागरूकता पैदा करना।

2. लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना।

3. लोगों में परस्पर सहयोग, व्यवहार, और भाईचारे को बढाना।

4. ग्रामीण विकास में जनसहभागिता, आमजन और युवाओं की भागीदारी बढ़ाना।

5. समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे- मृत्यु भोज, दहेज प्रथा, बाल-विवाह आदि को खत्म करके नव सोच पैदा करना।

6. सामाजिक बुराइयों जैसे रास्तों का अतिक्रमण, शराब, जुआ, गुटखा, बीडी और तंबाकू आदि व्यसनों से होने वाली समस्याओं के प्रतिभाव जगाना और इन पर प्रतिबंध लगाना।

7. समाज को सामाजिक, नैतिक और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करना।

8. बच्चों के शैक्षिक, नैतिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं, प्रतिभा सम्मान स्पोन्स आदि का आयोजन करना। गरीब व जरूरतमंद होनहार बच्चों के लिए कोचिंग संस्थानों, लाइब्रेरियों की स्थापना करना, आदि।

9. पर्यावरण व जल संरक्षण व संवर्धन के प्रति लोगों में चेतना पैदा करना।

10. सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ उनके लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद करना।

11. ग्राम विकास समितियों का गठन कर, ग्रामीण विकास और वित्तीय समावेशन में मदद करना।

हमारी टीम

मूल इस विचार की उत्पत्ति का के धौलपुर जिले के एक छोटे से गांव धनौरा से हुई। भारत के प्रधानमंत्री के कर कमलों से आदर्श ग्राम सम्मान विजेता स्मार्ट विलेज धनौरा, बाड़ी (धौलपुर, राजस्थान) कस्बे से 5 किमी की दूरी पर उत्तर पूर्व में एक छोटा सा गांव है। ।

स्मार्ट विलेज 'धनौरा' डॉ। सत्यपाल सिंह के विजन, ग्रामीणों की सक्रिय जन सहभागिता, सरकार और जिला प्रशासन के सहयोग और इको-नीड्स फाउंडेशन (प्रेसिडेंट प्रोफेसर प्रियानंद अगड़े) के निस्वार्थ प्रयासों का परिणाम है। राज्य सरकार द्वारा धनौरा ग्राम पंचायत को राज्य स्तरीय पंचायत अवार्ड से नवाजा गया है। धनौरा के संस्थागत विकास मॉडल, ग्रामीण विकास की मुहिम को दूसरे गांवों तक पहुंचाने और लोगों में जनचेतना पैदा करने के लिए "सोच बदलो गांव बदलो अभियान" की शुरुआत की गई है। |

डॉ। सत्यपाल सिंह मीना और इको नीड्स फाउंडेशन के मालिक प्रोफेसर प्रानंद अगड़े ने साथ, धौलपुर के कुछ सक्रिय और कर्मठ युवा सहयोगियों को साथ लेकर, विकास के संदर्भ में हाशिए पर चल रहे ग्रामीण क्षेत्रों में जन चेतना व राजनीतिक विकास बनाने के उद्देश्य से एक विशाल जन चेतना व जन जागरूकता यात्रा करने का मन बनाया। इस जनचेतना यात्रा को "सोच बदलो गांव बदलो यात्रा" का नाम दिया गया और इस यात्रा के माध्यम से महाराष्ट्र, राजस्थान और राजस्थान और राजस्थान के लगभग 100 गांवों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया। जिसमें 80 प्रतिशत गांव का दर्जा धौलपुर जिले से चुना गया। इसके लिए चुने हुए गाँवों में इस जनचेतना यात्रा के दौरान जनाब रखने की रूपरेखा तैयार की गई

हर गांव में टीम कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए गए थे। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, अपार जनसमर्थन और सहयोग मिलना से यह यात्रा एक अभियान का रूप लेती चली गई। दिन-ब-दिन "सोच बदलो गांव बदलो अभियान" अपने सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों के कारण लोगों के मन मस्तिष्क में परिवर्तन लाना शुरू कर दिया। इस अभियान और विचारधारा से जुड़ने वाले लोगों की टीम 21 मई 2017 से "सोच बदलो गांव बदलो टीम" के रूप में परिवर्तन शुरू हो गई है। वर्तमान में यह अभियान इन तीनों राज्यों के अतिरिक्त कई अन्य राज्यों के गांवों, शहरों व कस्बों में युवा दिलों की धड़कन बन चुका है। यही इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता भी कही जा सकती है क्योंकि इस सकारात्मक मुहिम ने युवा पीढ़ी की ऊर्जा को सहजिक और रचनात्मक कार्यों के प्रति अभिप्रेरित किया है।