घटना का विवरण

धनौरा गाँव भारत का पहला स्मार्ट विलेज बनकर समीक्षा

21 सितंबर 2018 से 22 सितंबर 2018

सोच बदलो - गाँव बदलो यात्रा का उद्घाटन डॉ। सत्यपाल जी की जन्मभूमि स्मार्ट विलेज धनौरा से दिनांक 14 मई 2017 को हुआ | धनौरा गाँव भारत का पहला स्मार्ट विलेज बनकर समीक्षा है | ग्रामीण विकास के इस मॉडल और विचार को दूसरे गांवों तक पहुंचाने के लिए सोच बदलो गांव बदलो यात्रा का उद्घाटन यही से किया गया है। सोच बदलो गांव बदलो यात्रा के विषय में विस्तृत रूप से बताने के लिए धनोरा गांव के अब तक के सफर पर एक नजर-

1. धनौरा गांव, बाबड़ी (धौलपुर, राजस्थान) कसबे से 5 किमी की दूरी पर उत्तर पूर्व में एक छोटा सा गांव है।] धनौरा गांव में पिछले 4-5 वर्षों में विकास की नई गाथा गढ़ी है। जिससे यह गाँव देश का पहला 'स्मार्ट गाँव' बनकर सामने आया है।

2. स्मार्ट विलेज 'धनौरा' डॉ। सत्यपाल सिंह के विजन, ग्रामीणों की सक्रिय जन भागीदारी, सरकार व जिला प्रशासन के सहयोग और इको-नीड्स फाउंडेशन (प्रेसिडेंट प्रोफेसर प्रियानंद अगोड) के निस्वार्थ प्रयासों का परिणाम है।

3. धनौरा गांव का कायाकल्प करने के लिए डॉ। सत्यपाल सिंह और प्रोफेसर प्रियानंद अगड़े ने एक बहुआयामी योजना तैयार की। इसके पाँच महत्वपूर्ण भाग थे; 
(i) पुनर्विकास - गांव में सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता की व्यवस्था करना और सामुदायिक भवन, पुस्तकालय, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, मेडिटेशन सेंटर, स्वास्थ्य केंद्र इत्यादि भवनों का निर्माण करना; 
(ii) रेट्रोफिटिंग - कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था करना (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन), रास्तों से अतिक्रमण हटाकर चौड़ा करना, स्कूल, पंचायत और अन्य महत्वपूर्ण भवनों का जीर्णोद्धार करना और इसके साथ-साथ गांव की सुंदरता बढ़ाना है; 
(iii) ग्रीन फील्ड - पेड़ और हरित आवरण के साथ का जल संरक्षण का उचित प्रबंधन करना, पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना, ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोतों के प्रयोग को बढ़ाना; 
(iv) ई-पैन - आधुनिक तकनीक का उपयोग करके स्मार्ट गांव के कामों के लिए डिजिटल स्मार्ट तरीके ढूंढना जैसे वाई-फाई फैसिलिटी, सीसीटीवी सर्विलांस, क्लास क्लास रूम्स, ई-लर्निंग, ई-लाइब्रेरी और 
(v) लाइवलीहुड - गांव में केवल उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग करके गांव वालों के लिए रोजगार सृजन करना। 
http://econeeds.org/smart-village.php?svid=1

4. अब तक के प्रयासों से हर घर में टॉयलेट्स (822-टॉयलेट), सीवरेज लाइन, सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, स्कूल में बच्चों के लिए आधुनिक शौचालय और सार्वजनिक स्थान पर शौचालय निर्माण का काम पूरा हो चुका है। जिला प्रशासन द्वारा धनौरा को जिले की पहली ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) पंचायत घोषित किया गया है।

5. गांव के मुख्य रास्ते के साथ-साथ इसे जोड़ने वाले विभिन्न आंतरिक रास्तों (गलियों) से अतिक्रमण हटा कर उन्हें 8-10 फीट चौड़ाई की जगह अब 20-25 फीट चौड़ा किया गया है और ये लगभग 2.3 किलोमीटर लंबी, उच्च कोटि की है। सीमेंटेड सड़कें बनाई गई हैं। लोगों के आपसी सहयोग व बलिदान की बदौलत गांव का हर रास्ता अतिक्रमण मुक्त है।

6. गाँव में गौरव पथ निर्माण करने के लिए 10 से 12 फीट चौड़े रास्ते को 20 से 25 फीट चौड़ा किया गया। राज्य सरकार द्वारा इस आधुनिक गौरव पथ का निर्माण किया गया है। गौरव पथ के निर्माण के लिए गांव के लोगों द्वारा स्वेच्छा से अपनी जमीन देना, सामाजिक जन चेतना और विकास में जन भागीदारी का सबसे बड़ा उदाहरण है। जहां एक ओर एक-एक इंच जमीन के लिए लोगों में लड़ाई झगड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धनौरा गांव वासियों ने हंसते-हंसते कई फीट जमीन गांव के विकास के लिए दे दी।

7. गांव की गलियों में, घरों की बाहरी दीवारों पर बने सुंदर और प्रेरणादायक भित्ति चित्र, क्लोगन और अनिश्चितक पंक्तियां गांव की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ गांव के बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा व सकारात्मक माहौल को जन्म देते हैं। पूरा गांव एक कलाकार के दरवाजे में तब्दील किया गया है।

8. गांव के सभी परिवारों से विशेषकर सरकारी कर्मचारियों के नियमित आर्थिक योगदान से गांव में सामुदायिक भवन और पुस्तकालय का निर्माण पूरा कर लिया गया है और प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य प्रगति पर है। गाँव में 200 से 300 लोगों की बैठने की क्षमता वाला सामुदायिक भवन, स्मार्ट विलेज धनौरा की खूबसूरती में चार चांद लगा दिया गया है।

9. गांव के बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देने की व्यवस्था भी की गई है। गांव व आसपास के होनहार बच्चों को गांव में ही स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए "उत्थान कोचिंग संस्थान" की शुरुआत हो गई है।] आओ पढ़ें-आगे बढ़ें, शिक्षा पाओ-ज्ञान बढ़ाओ इत्यादि कार्यक्रमों की शुरुआत स्मार्ट विलेज धनौरा से की गई है।

10. ग्रामीणों द्वारा शादी-ब्याह जैसे अन्य खुशी के आयोजनों के अवसर पर, गांव के ही युवक युवतियों के सरकारी नौकरी पाने या नए उद्यम शुरू करने की खुशी में, गांव के विकास के लिए एक निश्चित राशि 'ग्राम विकास समिति' को दी जाती है है। गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु पर मृत्युभोज के बजाय कोई भी रचनात्मक कार्य करने की व्यवस्था भी शुरू की गई है। गाँव की शमशान भूमि पर स्वजन स्मृति में वृक्षारोपण किया जाता है।

11. जल संरक्षण और संवर्धन के लिए अतिक्रमण हटा कर एक ढाई मीटर लंबी पैदल चलने वाली मानव निर्मित नहर का निर्माण और 8 परकोलेशन पैचबों का काम पूरा हो चुका है। एक अनुमान के अनुसार इस व्यवस्था से गांव की भूमि में प्रतिवर्ष 97.49 मिलियन लीटर पानी रिचार्ज होता है। प्रत्येक वर्ष वृक्षारोपण का कार्य नियमित रूप से किया जा रहा है। 'ग्रीन विलेज - क्लीन विलेज' का स्मार्ट स्मार्ट विलेज धनौरा की पहचान बन गया है।

11. गांव में विभिन्न स्थानों पर सोलर लाइट लगाने का काम भी पूरा हो चुका है। जिससे रात के समय में पूरा गांव दूधिया रोशनी से जगमगा उठता है। इससे अंधेरे के कारण महिलाओं और बच्चों को होने वाली परेशानी से भी पूरी तरह निजात मिल गई है।

12. वर्तमान में, गांव में कोई पुलिस केस दर्ज न होने के कारण, जिला प्रशासन द्वारा धनौरा गांव को “क्राइम फ्री विलेज” घोषित किया गया है। गांव में पूरी शराबबंदी व नशाखोरी के चलते गांव को 'अल्कोहल मुक्त गांव' भी घोषित किया गया है।

13. अभी तक इस गांव में सुधार केंद्र और मेडिटेशन सेंटर का निर्माण कार्य जारी है। आने वाले समय में स्किल डेवलपमेंट सेंटर, ग्रामीण विकास के लिए प्रशिक्षण केंद्र, वाई-फाई फैसिलिटी, सीसीटीवी सर्विलांस, क्लास क्लास रूम, ई-लर्निंग, ई-लाइब्रेरी और गांव में डेरा प्लांट जैसी कई योजनाएं मूर्त रूप लेना बाकी हैं। बच्चों के शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक विकास के लिए खेल मैदान का निर्माण भी होना है।

14. 16 जुलाई 2018 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मान्य प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्मार्ट विलेज धनौरा को "आदर्श ग्राम सम्मान" का खिताब देकर प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया। राज्य सरकार द्वारा धनौरा ग्राम पंचायत को राज्य स्तरीय पंचायत अवार्ड से भी नवाजा गया है और साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर जबलपुर में हुए कार्यक्रम में भी धनौरा गांव को शामिल किया गया।

15. ग्रामीण विकास की मुहिम को दूसरे गांवों तक पहुंचाने के लिए और लोगों को प्रेरित करने के लिए "सोच बदलो गांव बदलो अभियान" की शुरुआत की गई। SBGBT (सोच बदलो गांव बदलो टीम) का मानना ​​है कि वैचारिक जागरूकता ही किसी भी समाज के विकास का आधार होती है। हमारा देश गांवों का देश है, गांवों के विकास से ही हमारा देश सही मायने में आगे बढ़ सकेगा। इस टीम द्वारा अतिक्रमण मुक्ति, शराब मुक्ति, बच्चों को अच्छे संस्कार देने और युवाओं का मार्गदर्शन करने, महिला सशक्तीकरण, किसानों को सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने और ग्रामीण समस्याओं का जन सहयोग करके समाधान करने जैसे कई कार्य किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के कारण सोच बदलो गांव बदलो टीम के कार्य आज एक अभियान का रूप ले चुके हैं। इस अभियान के माध्यम से लोगों से अपने गांव, समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी निभाने की अपील की जा रही है।

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